अकांक्षा चमोला ने शादी के बाद पढ़ी-लिखी महिलाओं को दबाने और बढ़ते तलाक के मामलों पर खुलकर बात की। जानें उन्होंने लड़कों की परवरिश और नारी शक्ति पर क्या कहा।
शादी के बाद पढ़ी-लिखी लड़की की पहचान और उसके सपनों को दबाना बिल्कुल गलत है। बढ़ते तलाक के मामलों के बीच एक्ट्रेस अकांक्षा चमोला ने महिलाओं की आजादी और रिश्तों में बराबरी को लेकर खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि अगर कोई महिला आत्मनिर्भर है, तो उसे दोष देने के बजाय लड़कों को रिश्ते निभाने और ऐसी महिलाओं को समझने के लिए तैयार करना चाहिए। अकांक्षा ने अपने परिवार का उदाहरण देते हुए बताया कि उनके घर में मां ही हर बड़े फैसले में सबसे आगे रही हैं। जानिए आखिर क्या कहा एक्ट्रेस ने।
लड़कों को मैच्योर होने की है जरूरत
अगर आप महिला को ब्लेम कर रहे हो कि महिला बहुत ज्यादा इंडिपेंडेंट हो गई है या उसको रिश्तों की कदर नहीं, तो आपको अपने लड़के को समझाने की जरूरत है। अकांक्षा आगे कहती हैं कि लड़कों के पैरेंट्स को समझना चाहिए कि उनका बेटा इंडिपेंडेंट लड़की को संभालने के काबिन नहीं है। अगर आप खुले दिमाग के हैं, तो ही मैच्योर औरतों को संभाल सकेंगे।
पैरेंट्स लड़कों को सिखाएं डीलिंग
आगे अकांक्षा कहती हैं कि पेरेंट्स लड़कियों को तो पढ़ा रहे हैं लेकिन लड़कों को नहीं समझा रहे हैं कि कैसे पढ़ी-लिखी लड़की को हैडिंल करना है। पहले जमाने की तरह अब पढ़ी-लिखी महिलाओं को दबाकर रखना पॉसिबल नहीं है।
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मेरे घर में मां ही सबकुछ
अकांक्षा इंटरव्यू के दौरान बताती हैं कि उनके घर में सभी लोग वर्किंग थे। एक्ट्रेस अपने घर को मैट्रिआर्कल फैमिली बताती हैं, जहां मां की बात ही आखिरी शब्द माना जाता था। मम्मी जो बोल दें, वहीं बात मानी जाती है। यहां तक की घर से लेकर जायदाद तक मम्मी के नाम पर है। अकांक्षा आगे ये भी जोड़ती हैं कि मेरी मम्मी ने ही सबकुछ कमाया है।
राजा-रानी के जमाने से लें प्रेरणा
अकांक्षा अपनी बात रखते हुए कहती हैं आप पहले के समय के राजा रानी को देखें। अगर राजा की मृत्यु हो जाती थी, तो रानी ही बच्चों को संभाती और फिर राजा बनाती है। ब्रिटिश लोगों के आने के बाद भारत में महिलाओं की स्थिति कमजोर हो गई।
