Missing Boys Gujarat: गुजरात में अपने दो बेटों के गायब होने के बाद बिहार के एक दंपति ने अपनी नौकरी छोड़ दी और भिखारी का वेश बना लिया। जब पुलिस से मदद नहीं मिली, तो उन्होंने कई राज्यों में महीनों तक भटक-भटक कर खोजा और आखिरकार अपने दोनों बच्चों को भीख मांगते हुए ढूंढ निकाला।
Parents Search Missing Sons: घर के पास खेलते हुए दो बच्चे अचानक गायब हो गए... पुलिस ने कुछ दिन हाथ-पैर मारे और फिर कह दिया, 'बच्चे नहीं मिल रहे, हम क्या कर सकते हैं'... ये कहानी किसी भी आम इंसान की हो सकती है। लेकिन इन मां-बाप ने किस्मत को दोष देकर हार नहीं मानी। उन्होंने अपने बच्चों को खुद ढूंढने की ठानी और इसके लिए भिखारी बनकर शहर-शहर, गांव-गांव भटकते रहे। उनकी ये असली कहानी किसी भी फिल्मी स्क्रिप्ट को मात दे सकती है। ये रियल हीरो मां-बाप की कहानी अब वायरल हो रही है।
यह घटना गुजरात की है, जहां बिहार का एक परिवार काम के सिलसिले में रहता था। इसी साल जनवरी में उनके दो छोटे बेटे घर के पास खेलते-खेलते लापता हो गए। मां-बाप ने उन्हें बहुत ढूंढा, लेकिन वे नहीं मिले। पुलिस भी उनका पता नहीं लगा पाई। इसके बाद, माता-पिता ने एक चौंकाने वाला फैसला किया। उन्होंने भिखारी का वेश बनाकर अपने बेटों को पूरे देश में खोजने का फैसला किया। अपनी छोटी-मोटी नौकरी छोड़कर, वे इस उम्मीद में निकल पड़े कि उनके बच्चे कहीं न कहीं जरूर मिलेंगे। उन्हें शक था कि उनके बच्चों से कोई भीख मंगवा रहा होगा, इसलिए उन्होंने खुद भीख मांगते हुए उन्हें ढूंढने की ठानी।
भिखारी बन गए मां-बाप
मां-बाप अपने बच्चों के लिए कुछ भी कर सकते हैं, चाहे कितना भी पैसा लगे या कोई भी रूप धारण करना पड़े। इस दंपति ने यही किया। बिहार का यह परिवार काम की तलाश में गुजरात आया था। परिवार में पति-पत्नी और उनके दो बेटे थे - बड़ा बेटा राहुल (14) और छोटा बेटा अर्पित (11)। 15 जनवरी को राहुल और अर्पित खेलने के लिए घर से निकले और फिर वापस नहीं लौटे। दंपति ने उन्हें हर जगह ढूंढा।
उन्होंने पड़ोसियों और दोस्तों से अपने बेटों के बारे में पूछा, लेकिन निराशा ही हाथ लगी। फिर उन्होंने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने बच्चों की तलाश की, लेकिन वे कहीं नहीं मिले। माता-पिता ने अपनी खोज जारी रखी। तीन महीने बीत गए, लेकिन बच्चों की कोई खबर नहीं थी। माता-पिता को शक हुआ कि भिखारियों के किसी गिरोह ने उनके बेटों का अपहरण कर लिया है। इसलिए, उन्होंने खुद ही उन्हें ढूंढने का फैसला किया।
कैसे मिले दोनों बेटे?
दंपति ने अपनी नौकरी छोड़ दी और भिखारी बन गए। उन्होंने गुजरात, महाराष्ट्र, गोवा, राजस्थान और मध्य प्रदेश में दिन-रात भटकना शुरू कर दिया। उन्हें उम्मीद थी कि कहीं से तो बच्चों के बारे में कोई जानकारी मिलेगी। फिर उनकी मेहनत रंग लाई। किसी ने उन्हें बताया कि उनका बड़ा बेटा बिहार के भिखारियों के एक समूह के साथ देखा गया है, जहां वह भीख मांग रहा था। जब बच्चे की फोटो दिखाई गई, तो एक व्यक्ति ने माता-पिता को यह जानकारी दी। वे तुरंत भागलपुर पहुंचे, लेकिन तब तक वह वहां से जा चुका था। दंपति ने भिखारी के वेश में बच्चों की तलाश जारी रखी। आखिरकार, उन्होंने अपने बड़े बेटे को बीकानेर में भीख मांगते हुए ढूंढ निकाला और उसे अपने साथ ले आए।
इसके बाद उन्होंने अपने छोटे बेटे की तलाश शुरू की। वे फिर से शहर-शहर घूमने लगे। करीब 15 दिन बाद, उन्होंने अपने छोटे बेटे को पश्चिम बंगाल के हावड़ा में भीख मांगते हुए पाया। इस तरह, मां-बाप की लगन और हिम्मत ने उनके दोनों बच्चों को वापस दिला दिया। शायद ही किसी फिल्म में इतनी सच्ची और दिल छू लेने वाली कहानी देखने को मिले। यह घटना इस बात का सबूत है कि मां-बाप अपने बच्चों के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं।
