78 वीरता पुरस्कारों का ऐलान! 13 वीरों का सर्वोच्च बलिदान, शौर्य चक्र में 'बार' का अनोखा कारनामा... पर आखिर कौन है 'ऑपरेशन रक्षक' का वो बेज़ुबान नायक, जिसकी जांबाजी ने हर किसी को हैरान कर दिया? एक जवान को दूसरी बार शौर्य चक्र में ‘बार’ क्यों मिला? जानिए वीरता पुरस्कारों की पूरी कहानी और इस बार की खास सूची।
Independence Day Awards 2026: स्वतंत्रता दिवस 2026 की पूर्व संध्या पर भारत देश अपने वीरों की बहादुरी और अदम्य साहस को नमन कर रहा है। देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सशस्त्र बलों और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPFs) के जवानों के लिए 78 वीरता पुरस्कारों (Gallantry Awards) को आधिकारिक मंज़ूरी दे दी है। इन प्रतिष्ठित पुरस्कारों में 9 कीर्ति चक्र, 19 शौर्य चक्र, 36 सेना मेडल (वीरता), 3 नौसेना मेडल और 5 वायु सेना मेडल शामिल हैं। देश की संप्रभुता और सुरक्षा की खातिर अपनी जान की बाजी लगाने वाले जांबाजों में से 13 वीरों को यह सम्मान मरणोपरांत दिया जा रहा है।

19 शौर्य चक्र में एक नाम फिर क्यों चर्चा में?
इस बार 19 शौर्य चक्र प्रदान किए गए हैं, जिनमें एक मरणोपरांत सम्मान शामिल है। सबसे खास नाम राजपूताना राइफल्स के मेजर आदित्य प्रताप सिंह का है, जिन्हें शौर्य चक्र दूसरी बार दिया जा रहा है। फिलहाल 44 असम राइफल्स में तैनात मेजर सिंह के नाम के साथ सेना मेडल भी दर्ज है। जून 2026 में भारत-म्यांमार सीमा पर उग्रवादियों के खिलाफ चलाए गए एक साहसिक अभियान में असाधारण वीरता दिखाने के लिए उन्हें शौर्य चक्र से सम्मानित किया गया था। अब दोबारा अदम्य साहस दिखाने के लिए उनके मूल शौर्य चक्र के साथ ‘बार’ से सम्मानित किया जा रहा है।

शौर्य चक्र में 'बार' की रहस्यमयी गाथा: आखिर क्या है मेजर आदित्य प्रताप सिंह का पराक्रम?
वीरता पुरस्कारों की इस सूची में राजपूताना राइफल्स के मेजर आदित्य प्रताप सिंह का नाम सबसे खास और चर्चा का विषय बना हुआ है। फिलहाल 44 असम राइफल्स में तैनात मेजर आदित्य को इस बार 'शौर्य चक्र में बार' (Bar to Shaurya Chakra) से सम्मानित किया जा रहा है। सैनिकी परंपरा में 'बार' का अर्थ मूल पदक के साथ दोबारा वही सर्वोच्च वीरता पुरस्कार प्राप्त करना होता है। जून 2026 में भारत-म्यांमार सीमा पर उग्रवादियों के खिलाफ चलाए गए एक साहसिक ऑपरेशन में अभूतपूर्व वीरता दिखाने वाले मेजर सिंह ने एक बार फिर अपनी जांबाजी से देश का सिर ऊंचा किया है।
आखिर ‘बार’ का मतलब क्या होता है?
वीरता पुरस्कारों में ‘बार’ का मतलब किसी व्यक्ति को उसी श्रेणी का वीरता पुरस्कार दोबारा मिलने से है। यानी अगर किसी जवान या अधिकारी को पहले शौर्य चक्र मिल चुका है और बाद में वह फिर उसी स्तर की असाधारण वीरता दिखाता है, तो उसे दूसरा पदक देने के बजाय उसके मूल पुरस्कार के साथ ‘बार’ प्रदान किया जाता है। यही वजह है कि मेजर आदित्य प्रताप सिंह का सम्मान इस बार खास बन गया है। यह उनके लगातार दो अभियानों में प्रदर्शित असाधारण साहस की पहचान है।
7 मरणोपरांत कीर्ति चक्र: जब भारत के 9 सपूतों ने रचा स्वर्णिम इतिहास
शांति-काल का दूसरा सबसे बड़ा वीरता पुरस्कार 'कीर्ति चक्र' इस साल 9 जांबाजों को दिया गया है, जिनमें से 7 वीरों को यह सम्मान मरणोपरांत मिला है। लेफ्टिनेंट कर्नल मनियो फ्रांसिस और मेजर जितेंद्र राठी के अलावा हवलदार गजेंद्र सिंह, हेड कांस्टेबल जगबीर सिंह, एसजी कांस्टेबल जसवंत सिंह, एसजी कांस्टेबल बलविंदर सिंह, एसजी कांस्टेबल तारिक हुसैन, हेड कांस्टेबल बशीर अहमद और एसटीएफ इंस्पेक्टर सुनील कुमार ने मातृभूमि की रक्षा में अपना सर्वोच्च बलिदान दिया।

ऑपरेशन रक्षक का वो 'अनाम' रक्षक: जिसने इंसानों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर लड़ी जंग
इस साल के मेंशन-इन-डिस्पैचेस (Mention-in-Despatches) की सूची में एक बेहद चौंकाने वाला और दिल को छू लेने वाला नाम शामिल है। राष्ट्रपति द्वारा मंजूर 89 मेंशन-इन-डिस्पैचेस में भारतीय सेना के 75, भारतीय नौसेना के 4 और भारतीय वायुसेना के 10 जवान शामिल हैं। इनके अलावा भारतीय सेना के 'आर्मी डॉग टायसन' को भी सम्मानित किया गया है। 'ऑपरेशन रक्षक' के तहत दुश्मनों और आतंकवादियों के नापाक मंसूबों को नाकाम करने में टायसन ने जो वफादारी और सूझ-बूझ दिखाई, उसने साबित कर दिया कि भारत की सीमाओं की निगहबानी में हर एक रक्षक का योगदान अनमोल है।
301 पुलिस व फायर कर्मियों को मेडल: सुरक्षा बलों की निष्ठा को देश का सलाम
स्वतंत्रता दिवस के इस पावन अवसर पर पुलिस, फायर सर्विस, होम गार्ड, सिविल डिफेंस और जेल सेवाओं के 1,057 कर्मियों को गैलेंट्री और सर्विस मेडल देने की घोषणा की गई है। इनमें 301 गैलेंट्री मेडल, 92 प्रेसिडेंट्स मेडल फॉर डिस्टिंग्विश्ड सर्विस और 664 मेडल फॉर मेरिटोरियस सर्विस शामिल हैं। इसके साथ ही, जांच एजेंसियों में उत्कृष्ट योगदान देने वाले CBI के 21 अधिकारियों और कर्मचारियों को भी राष्ट्रपति पदक से सम्मानित किया गया है, जो देश की आंतरिक सुरक्षा को मजबूत करने में उनकी अटूट निष्ठा को दर्शाता है।
वीरता की इस सूची में छिपा सबसे बड़ा संदेश
स्वतंत्रता दिवस से ठीक पहले घोषित ये सम्मान केवल पदक और प्रशस्ति पत्र नहीं हैं, बल्कि उन जवानों के साहस और बलिदान की सार्वजनिक मान्यता हैं, जिन्होंने देश की सुरक्षा और कर्तव्य के लिए असाधारण जोखिम उठाया। खास तौर पर 13 मरणोपरांत वीरता पुरस्कार यह याद दिलाते हैं कि कई वीरों ने देश की रक्षा करते हुए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया। वहीं, एक ही अधिकारी को दोबारा शौर्य चक्र के साथ ‘बार’ मिलना बताता है कि असाधारण वीरता का सम्मान एक बार तक सीमित नहीं है-कर्तव्य के दौरान दोबारा वही साहस दिखाने पर उसी स्तर का सम्मान फिर अर्जित किया जा सकता है।


