बांकीपुर उपचुनाव में प्रशांत किशोर 27वें राउंड तक 16,887 वोटों से आगे हैं। जीत से पहले उन्होंने बांकीपुर के विकास को लेकर एक बड़ी बात कही, जो काफी चर्चा में है।
Bankipur Bypoll Result: बांकीपुर उपचुनाव में जनसुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर लगातार बढ़त बनाए हुए हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, 27वें राउण की काउंटिंग तक पीके 16,887 वोटों की बढ़त बनाए हुए हैं। प्रशांत किशोर को फिलहाल 53,566 वोट मिले हैं, जबकि दूसरे नंबर पर चल रहे बीजेपी के नीरज कुमार को 38,893 वोट मिले हैं। जीत की ओर तेजी से बढ़ रहे प्रशांत किशोर की चुनाव नतीजों को लेकर पहली प्रतिक्रिया सामने आई है।
मेरी जीत से बांकीपुर बेंगलुरू नहीं बनेगा- प्रशांत किशोर
प्रशांत किशोर ने कहा, जीत के बाद हमारा पहला काम यही है कि बांकीपुर की जनता ने जो आशीर्वाद दिया है, अपनी ओर से जो हो सकेगा यहां सुधार का प्रयास करेंगे। अगले 2-3 महीने में वो चीजें आपको दिखेंगी भी। मैं कोई बहुत बड़ी-बड़ी बात बोलना नहीं चाहता हूं। मेरे विधायक बनने से बांकीपुर बेंगलोर नहीं बनेगा, लेकिन यहां पर आपको सुधार होता दिखेगा।
बांकीपुर के नाली-गली पर नहीं लड़ा गया चुनाव
प्रशांत किशोर ने आगे कहा, बड़ी बात ये है कि ये चुनाव बांकीपुर के नाली-गली पर नहीं लड़ा गया है। ये चुनाव लड़ा गया है कि बिहार का नेतृत्व किसके हाथ में होना चाहिए और बांकीपुर की जनता ने भाजपा नेतृत्व को ये साफ संदेश दिया है कि भाई आप अच्छे आदमी को बिहार का मुख्यमंत्री बनाइए। सम्राट चौधरी की जगह किसी कुश्वाहा को बनाना है, बनाइए। हर हालत में बिहार की तरक्की होनी चाहिए। व्यक्ति या दल भले कोई जीते। लोकतंत्र में हार-जीत तो होती रहती है।
31 में से 27 राउंड की काउंटिंग पूरी
बिहार की बांकीपुर विधानसभा सीट पर उपचुनाव की मतगणना जारी है। फिलहाल 31 में से 27 राउंड पूरे होने तक जन सुराज पार्टी के प्रशांत किशोर काफी आगे चल रहे हैं। ऐसे में अब माना जा रहा है कि पीके की जीत कोई नहीं रोक सकता।
कौन हैं प्रशांत किशोर?
प्रशांत किशोर देश के जाने-माने चुनावी रणनीतिकार (Political Strategist) और जन सुराज पार्टी के संस्थापक हैं। उन्हें भारत में डेटा आधारित चुनावी रणनीति और सफल चुनाव अभियानों के लिए जाना जाता है। कई बड़े राजनीतिक दलों और नेताओं के साथ काम करने के बाद उन्होंने सक्रिय राजनीति में कदम रखा। प्रशांत किशोर को 2014 के लोकसभा चुनाव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चुनाव अभियान से राष्ट्रीय पहचान मिली। इसके बाद उन्होंने Indian Political Action Committee (I-PAC) की स्थापना की और कई राज्यों में अलग-अलग राजनीतिक दलों के लिए चुनावी रणनीति तैयार की।


