Smart financial planning: आज के ज़माने में लाखों की सैलरी वाले सॉफ़्टवेयर इंजीनियर भी महीने के आखिर में उधार मांगते हैं. लेकिन एक घरेलू सहायिका हर महीने ₹60,000 कमा रही हैं! यही नहीं, उनका सेविंग्स प्लान देखकर बड़े-बड़े कॉर्पोरेट अधिकारी भी हैरान हैं.

Domestic worker Income:ज की मॉडर्न लाइफस्टाइल में लाखों रुपये कमाने वालों के हाथ में भी महीने के आखिर में पैसा नहीं बचता. क्रेडिट कार्ड बिल, कार और मोबाइल की EMI के बीच आज की युवा पीढ़ी उलझकर रह गई है. लेकिन, एक घरेलू सहायिका ने अपनी मेहनत और शानदार बचत योजना से बड़े-बड़े कॉर्पोरेट अधिकारियों को भी सोचने पर मजबूर कर दिया है!

दिल्ली के पास गुरुग्राम में रहने वाले एक कॉर्पोरेट कर्मचारी शिव मित्तल ने अपने घर में काम करने वाली महिला की कमाई और लाइफस्टाइल के बारे में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'लिंक्डइन' पर एक पोस्ट शेयर किया है, जो अब तेजी से वायरल हो रहा है.

महीने की कमाई ₹60,000!

मित्तल के मुताबिक, यह महिला किसी बड़ी कंपनी या सरकारी नौकरी में नहीं हैं. वह हर दिन 5 से 6 घरों में मेहनत से काम करती हैं. महीने में सिर्फ 3 से 4 दिन की छुट्टी लेकर, अपनी ईमानदारी और मेहनत से हर महीने ₹60,000 कमाती हैं! यह कमाई कई सॉफ्टवेयर इंजीनियरों से भी ज़्यादा है.

बचत का प्लान सुनकर सब हैरान

सिर्फ कमाई ही नहीं, बल्कि उनके पैसे मैनेज करने का तरीका सबसे ज़्यादा चर्चा में है. वह हर महीने ₹10,000 घर का किराया देती हैं. अपनी बेटी को एक अच्छे इंग्लिश मीडियम स्कूल में पढ़ा रही हैं. सबसे बड़ी बात यह है कि उन्होंने अपने होमटाउन में ₹6 लाख की एक ज़मीन खरीदी है, जिसकी किस्त (EMI) वह हर महीने समय पर चुका रही हैं!

कॉर्पोरेट कर्मचारी ने क्या कहा?

शिव मित्तल ने तारीफ करते हुए लिखा, "हम महीने में लाखों कमाने के बाद भी ब्रांडेड कपड़ों, महंगे फोन और कारों के लिए फालतू की EMI भरते हैं. लेकिन इस महिला के पास कोई पीएफ या ग्रेच्युटी की सुविधा नहीं है, फिर भी उन्हें पता है कि पैसा कहां लगाना है. उनकी सादगी भरी ज़िंदगी और बेटी के भविष्य के लिए बनाया गया उनका प्लान हम सभी के लिए एक बड़ा सबक है."

लोगों ने दी मिली-जुली प्रतिक्रिया

इस पोस्ट पर सोशल मीडिया यूजर्स अलग-अलग तरह की प्रतिक्रिया दे रहे हैं. कुछ लोगों ने कहा, "कॉर्पोरेट कर्मचारियों को मिलने वाली हेल्थ इंश्योरेंस जैसी सुविधाएं ऐसे असंगठित क्षेत्र के मजदूरों को नहीं मिलतीं. एक छोटी सी बीमारी भी उनकी पूरी बचत खत्म कर सकती है. इसलिए, उनकी मेहनत की तारीफ होनी चाहिए, लेकिन हेल्थ इंश्योरेंस करवाना भी बहुत ज़रूरी है." कुल मिलाकर, इस महिला का फाइनेंशियल डिसिप्लिन आज की युवा पीढ़ी के लिए एक मिसाल बन गया है.