Bhotekoshi River: नेपाल में भोतेकोशी नदी का जलस्तर बढ़ने पर रविवार को नया बाढ़ अलर्ट जारी हुआ। देश में 788 मौतें, 2,502 लापता; चीन की ओर 16 मौतें, 546 लापता। शिन्हुआ के अनुसार ऊपरी धारा में 5.6 किमी दूर 1.4 मिलियन क्यूबिक मीटर (370 मिलियन गैलन) पानी वाला गड्ढा जोखिम बना है।
Nepal Flood Alert: नेपाल में 26 अगस्त की विनाशकारी बाढ़ के बाद हालात अब भी बेहद चिंताजनक बने हुए हैं। रविवार को भोतेकोशी नदी का जलस्तर बढ़ने के बाद अधिकारियों ने नया बाढ़ अलर्ट जारी किया। इसके बाद प्रभावित इलाकों में लोगों के मोबाइल फोन पर लगातार चेतावनी संदेश पहुंचने लगे। आपदा प्रबंधन से जुड़े आंकड़ों के अनुसार, नेपाल में बाढ़ और उससे जुड़ी घटनाओं में मरने वालों की संख्या 788 तक पहुंच गई है, जबकि 2,502 लोग अब भी लापता हैं। नेपाल और तिब्बत को मिलाकर मृतकों की संख्या कम से कम 800 बताई गई है।
भोतेकोशी नदी के बढ़ते जलस्तर से फिर खतरा
नेपाल की आपदा जोखिम न्यूनीकरण तथा प्रबंधन प्राधिकरण (NDRRMA) के मुख्य कार्यकारी धर्म राज उप्रेती के मुताबिक, चीन की ओर से मिले इनपुट के बाद भोतेकोशी नदी को लेकर ताजा चेतावनी जारी की गई।
शिन्हुआ ने जल संसाधन मंत्रालय के हवाले से बताया कि हालिया बाढ़ के बाद पहाड़ों में बना झीलनुमा जलाशय काफी हद तक खाली हो चुका है। हालांकि, उससे करीब 5.6 किलोमीटर ऊपर एक गड्ढे में लगभग 1.4 मिलियन क्यूबिक मीटर पानी अब भी जमा है। ऐसे में प्रशासन इस इलाके पर लगातार नजर रख रहा है।
धादिंग में तबाही के बीच घर लौट रहे लोग
बाढ़ से सबसे ज्यादा प्रभावित इलाकों में तबाही का मंजर साफ दिखाई दे रहा है। धादिंग में लोग मलबे में तब्दील हो चुके अपने घरों तक लौट रहे हैं और जो सामान बचा है, उसे निकालने की कोशिश कर रहे हैं। कई मकानों की दीवारें बह चुकी हैं और घरों के अंदर कीचड़ भर गया है।
स्थानीय लोगों के मुताबिक, कई परिवारों ने अपना सब कुछ खो दिया है। शर्मिला तमांग ने अपनी स्थिति बताते हुए कहा कि उनके घर समेत कुछ भी नहीं बचा। वहीं, बाढ़ से क्षतिग्रस्त एक प्रमुख पावर प्लांट की भी रविवार को जांच शुरू की गई। यह संयंत्र चार जिलों में 20 हजार से अधिक लोगों को बिजली उपलब्ध कराता है।
लगातार अलर्ट ने बढ़ाई लोगों की मुश्किल
प्रभावित इलाकों में सिर्फ बाढ़ और मलबा ही चुनौती नहीं है। कई जगहों पर बिजली व्यवस्था अब भी प्रभावित है और क्षतिग्रस्त बिजली की लाइनें कीचड़ में दबी हुई हैं। इसके बीच मोबाइल पर बार-बार आने वाले बाढ़ अलर्ट ने लोगों की चिंता और बढ़ा दी है।
गोविंद श्रेष्ठ ने बताया कि जब भी बाढ़ की चेतावनी आती है, उन्हें परिवार के साथ ऊंचे स्थानों की ओर भागना पड़ता है। बुजुर्ग माता-पिता को सुरक्षित जगह तक पहुंचाना उनके लिए बेहद मुश्किल हो गया है।
पुल और सड़कें टूटीं, कई इलाके कटे
बाढ़ के कारण कई बड़े कंक्रीट पुल और छोटे झूला पुल बह गए हैं। इसके चलते कई बस्तियों का संपर्क टूट गया है। राहत और बचाव दल काठमांडू को प्रभावित क्षेत्रों से जोड़ने वाले मुख्य राजमार्ग को साफ करने और रास्ता बहाल करने में जुटे हैं।
सीमा पार चीन के तिब्बत क्षेत्र में भी भारी नुकसान हुआ है। रिपोर्टों के अनुसार, वहां 16 मौतों की पुष्टि हुई है और 546 लोग लापता बताए गए हैं। शिन्हुआ के मुताबिक, तिब्बत में 261 विदेशी नागरिक भी लापता हैं, जिनमें 100 से अधिक नेपाली नागरिक शामिल हैं।
हिमनद धंसने से शुरू हुई थी तबाही
इस आपदा की शुरुआत हिमालयी क्षेत्र में हिमनद के नीचे चट्टान धंसने की घटना से बताई गई है। अचानक बड़ी मात्रा में चट्टान और पिघला पानी घाटियों की नदियों में पहुंचा, जिससे बेहद तेज बहाव पैदा हुआ और पुल, सड़कें तथा इमारतें बह गईं।
नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने जलवायु परिवर्तन को लेकर चिंता जताते हुए कहा कि वैश्विक उत्सर्जन में नेपाल की हिस्सेदारी बेहद कम है, लेकिन देश जलवायु परिवर्तन के गंभीर प्रभावों का सामना कर रहा है।
हालांकि, वैज्ञानिक किसी एक घटना को सीधे जलवायु परिवर्तन से जोड़ने से पहले और अध्ययन की जरूरत बता रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ता तापमान और हिमालयी क्षेत्रों में बदलती परिस्थितियां भविष्य में ऐसी आपदाओं के जोखिम को बढ़ा सकती हैं।
