महाकलेश्वर के शहर उज्जैन से एक अघोरी महिला ने ऐसा कृत्य किया है, जिसका मंजर देखकर आपकी रूह कांप जाएगी। वह चलती चिता से मांस खाती नजर आ रही है। इस घटना से साधु-संतों में आक्रोश है। वीडियो में देखिए रोंगटे खड़े कर देने वाला मंजर…
बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन से एक ऐसी घटना सामने आई है, जिसे मात्र सुनकर आपका दिल दहल जाएगा। जिस किसी ने उस खौफनाक मंजर का वीडियो देखा उसके रोंगटे खड़े हो गए। यहां एक अघोरी महिला श्मशान घाट पर एक जलती चिता से मांस निकालकर खाती नजर आ रही है। साथ ही उसने कुछ लोगों को खतरनाक चेतावनी भी दे रही है। वहीं इस वीडियो के बाद उज्जैन के साधु-संतों ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए इस कृत्य की कड़े शब्दों में निंदा की है।
कौन है जलती चिता से मांस खाने वाली महिला
दरअसल, वायरल वीडियो में नजर आ रही महिला खुद को अघोरी और किन्नर अखाड़ा की महामंडलेश्वर बता रहीहै। जिसका नाम काली उर्फ नंद गिरी है। वीडियो में साफ तौर पर देखा जा सकता है कि वह अघोरी उज्जैन के श्मशान घाट में भेष-भूषा में नजर आ रही है। जो कि हाथ में तलवार लिए जलती चिता के पास खड़ी दिखाई दे रही है। सबसे पहले वह वीडियो में कहती है कि ‘हम आज इंसान का मांस खाएंगे। इसके बाद वह तलवार के जरिए चिता से मांस का एक टुकड़ा निकालती है। फिर उसे खाने लगती है।
सोशल मीडिया पर वीडियो से मचा हड़कंप
इस अघोरी महिला सोशल मीडिया पर भी एक्टिव रहती है। उसने इस खौफनाक वीडियो को अपने इंस्टाग्राम अकाउंट से शेयर किया है। देखते ही देखते उसका यह वीडियो तेजी से फैल गया। वीडियो में वह मांस खाते हुए और धमकी देते हुए भी नजर आ रही है। वह कहती है ''हम कुछ भी कर सकते हैं, इंसान को खा सकते हैं, वह भी जलता हुआ, ध्यान रखना हम किसी ने नहीं डरते हैं। किसी के बस की बात नहीं हैं इस तरह जलती चिता से गरम इंसान को खाना...तुम सोच लो मैं क्या कर सकती हूं...हालांकि एशिया नेट न्यूज इस वीडियो की प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।
उज्जैन के संतों ने की FIR की मांग
बता दें कि अघोरी महिला का वीडियो वायरल होने के बाद उज्जैन के साधु-संतों ने इस कृत्य की निंदी की है। साथ ही पुलिस प्रशासन से इस मामले पर तुरंत संज्ञान लेने और आरोपी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के सख्त कार्रवाई करने की मांग की है। वहीं जूना अखाड़ा के महामंडलेश्वर शैलेशानंद गिरी महाराज समेत कई प्रमुख संतों ने कहा कि इस तरह का व्यवहार सनातन धर्म और अघोर परंपरा की मर्यादा के पूरी तरह खिलाफ है।


