गुजरात में भूपेंद्र पटेल सरकार के 5 साल में सेमीकंडक्टर क्षेत्र को नई रफ्तार मिली। 13.66 बिलियन डॉलर निवेश, 6 प्रोजेक्ट और साणंद-धोलेरा में बड़ा इकोसिस्टम विकसित हो रहा है।
गांधीनगर। गुजरात में मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के सुशासन के पांच वर्ष 13 सितंबर, 2026 को पूरे हो रहे हैं। इस अवधि में राज्य ने विकास के कई क्षेत्रों में अपनी स्थिति मजबूत की है। इनमें सेमीकंडक्टर क्षेत्र का उभरना एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में सामने आया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गुजरात के मुख्यमंत्री रहते शुरू किए गए विकास विजन को आगे बढ़ाते हुए राज्य सरकार ने सेमीकंडक्टर उद्योग के लिए निवेश, बुनियादी ढांचे, कौशल विकास और अनुसंधान पर जोर दिया है। सरकार के अनुसार, गुजरात अब भारत के प्रमुख सेमीकंडक्टर हब के रूप में अपनी जगह बना रहा है।
Gujarat Semiconductor Investment: राज्य में 13.66 बिलियन डॉलर से अधिक का निवेश
गुजरात में सेमीकंडक्टर क्षेत्र में 13.66 बिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक का निवेश आया है। भारत सरकार द्वारा मंजूर किए गए कुल 12 सेमीकंडक्टर प्रोजेक्ट में से 6 प्रोजेक्ट गुजरात में हैं। यह स्थिति केवल निवेश के आंकड़ों तक सीमित नहीं है। इससे चिप निर्माण, असेंबली, टेस्टिंग, पैकेजिंग, डिजाइन और अनुसंधान जैसे क्षेत्रों में गुजरात की बढ़ती क्षमता का भी संकेत मिलता है। राज्य में सेमीकंडक्टर से जुड़ी अलग-अलग गतिविधियों के लिए इकोसिस्टम तैयार हो रहा है, जिससे उत्पादन से लेकर चिप की अंतिम पैकेजिंग तक कई स्तरों पर काम संभव हो सकेगा।
Sanand Semiconductor Hub: माइक्रोन से OSAT कंपनियों तक बढ़ी क्षमता
गुजरात के सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम में साणंद और धोलेरा की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण बनकर उभर रही है। साणंद में माइक्रोन टेक्नोलॉजी की DRAM और NAND मेमोरी चिप्स के लिए अत्याधुनिक ATMP (असेंबली, टेस्ट, मार्किंग और पैकेजिंग) सुविधा वाणिज्यिक रूप से कार्यरत है। इसके अलावा, साणंद में सीजी पावर, रेनेसां, स्टार्स माइक्रोइलेक्ट्रॉनिक्स की उन्नत OSAT (Outsourced Semiconductor Assembly and Test) सुविधाएं भी वाणिज्यिक रूप से संचालित हैं।
वहीं, केन्स सेमीकॉन की हाई-एंड चिप पैकेजिंग आधारित OSAT सुविधा भी साणंद में कार्यरत है। इस तरह गुजरात में अब केवल चिप निर्माण पर ध्यान नहीं है। असेंबली, टेस्टिंग और पैकेजिंग के लिए भी पूरी क्षमता विकसित की जा रही है।
Dholera Semiconductor Fab: भारत की पहली वाणिज्यिक चिप फैब का निर्माण
धोलेरा में टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स द्वारा भारत की पहली वाणिज्यिक सेमीकंडक्टर फैब का निर्माण किया जा रहा है। यहां 110 से 28 नैनोमीटर प्रोसेस नोड्स का उपयोग करते हुए CMOS लॉजिक चिप्स का उत्पादन किया जाएगा। धोलेरा में क्रिस्टल मैट्रिक्स द्वारा भारत की पहली वाणिज्यिक मिनी और माइक्रो LED डिस्प्ले फैब्रिकेशन तथा पैकेजिंग यूनिट भी विकसित की जा रही है।
इसके अलावा, सूरत में सुचि सेमीकॉन ने छोटे पैमाने पर उत्पादन शुरू किया है और अब पूर्ण पैमाने की OSAT सुविधा की दिशा में विस्तार किया जा रहा है। इन परियोजनाओं से गुजरात के सेमीकंडक्टर क्षेत्र में निर्माण, पैकेजिंग और डिस्प्ले तकनीक से जुड़ी गतिविधियों का दायरा बढ़ रहा है।
Dholera SIR: सेमीकंडक्टर निवेश के लिए तैयार हो रहा विश्वस्तरीय इंफ्रास्ट्रक्चर
धोलेरा विशेष निवेश क्षेत्र (SIR) में सेमीकंडक्टर उद्योग की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए बुनियादी सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। यहां निवेशकों के लिए सुविधाएं यह उपलब्ध कराई जा रही हैं:
- बड़े भूमि पार्सल
- विश्वसनीय बिजली और जलापूर्ति
- प्लग-एंड-प्ले सुविधाएं
- बंदरगाहों और एयरपोर्ट से कनेक्टिविटी
- एक्सप्रेसवे और दिल्ली-मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर से जुड़ाव
सरकार के अनुसार, यह इंफ्रास्ट्रक्चर धोलेरा को सेमीकंडक्टर निवेश के लिए आकर्षक स्थान बनाता है।
Gujarat Semiconductor Policy: निवेशकों के लिए विशेष प्रोत्साहन
सेमीकंडक्टर क्षेत्र के लिए गुजरात सरकार ने विशेष प्रोत्साहनों की भी घोषणा की है। केंद्र सरकार की कैपेक्स सहायता के अतिरिक्त राज्य की नीति में 40 प्रतिशत अतिरिक्त पूंजी निवेश सहायता का प्रावधान है। इसके अलावा यह प्रावधान भी शामिल हैं:
- FAB प्रोजेक्ट के लिए आवश्यक पहले 200 एकड़ भूमि पर 75 फीसदी सब्सिडी
- स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन शुल्क की 100 प्रतिशत प्रतिपूर्ति
- 10 वर्ष तक प्रति यूनिट 2 रुपये की पावर टैरिफ सब्सिडी
इन सुविधाओं का उद्देश्य सेमीकंडक्टर कंपनियों को निवेश के लिए अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराना है।
Semiconductor Skill Development: गुजरात में प्रशिक्षण और चिप डिजाइन पर जोर
मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में गुजरात ने सेमीकंडक्टर क्षेत्र में केवल निवेश आकर्षित करने तक खुद को सीमित नहीं रखा है। सरकार के अनुसार, उद्योग की जरूरतों के मुताबिक कौशल विकास और प्रशिक्षण का इकोसिस्टम भी तैयार किया जा रहा है। पंडित दीनदयाल एनर्जी यूनिवर्सिटी (PDEU) द्वारा माइक्रोन टेक्नोलॉजी के सहयोग से ATMP प्रशिक्षण केंद्र विकसित किया जा रहा है। वहीं, गुजरात टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी (GTU) में ChipIN एक्सटेंशन सेंटर और सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना की जा रही है। यहां विद्यार्थियों को VLSI डिजाइन और चिप डिजाइन की पूरी प्रक्रिया का प्रशिक्षण मिलेगा।
Dholera ITI और IIT Gandhinagar में उन्नत प्रशिक्षण
धोलेरा ITI में सेमीकंडक्टर उद्योग के लिए भारत का पहला अल्ट्रा हाई प्योरिटी (UHP) वेल्डिंग प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किया गया है। इसके अलावा, इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) तथा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग, गुजरात के सहयोग से IIT गांधीनगर में उन्नत सेमीकंडक्टर निर्माण, अनुसंधान और प्रशिक्षण के लिए समर्थ केंद्र की स्थापना की गई है। इन पहलों का उद्देश्य उद्योग के लिए प्रशिक्षित मानव संसाधन तैयार करना और विद्यार्थियों को सेमीकंडक्टर तकनीक के व्यावहारिक पक्ष से जोड़ना है।
Gujarat Semiconductor Growth: विकास यात्रा में जुड़ा नया तकनीकी अध्याय
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘विकसित भारत’ के विजन के साथ गुजरात ने सेमीकंडक्टर क्षेत्र में अपनी गतिविधियों को तेजी दी है। सरकार के अनुसार, एक समय सेमीकंडक्टर के लिए वैश्विक सप्लाई चेन पर निर्भर भारत अब इस क्षेत्र में अपनी उत्पादन क्षमता विकसित कर रहा है। गुजरात इस बदलाव में अग्रणी भूमिका निभा रहा है। निवेश, चिप निर्माण, OSAT सुविधाओं, डिस्प्ले तकनीक, कौशल विकास और अनुसंधान के विस्तार के साथ गुजरात का सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम देश की तकनीकी विकास यात्रा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बनता जा रहा है।

