जेपी नड्डा की आरक्षण हटाओ आंदोलन के प्रतिनिधियों से मुलाकात के बाद CJP और AAP ने सरकार से जाति आधारित आरक्षण और पीएम मोदी के रुख पर सवाल उठाए।
Reservation Hatao Andolan: जाति आधारित आरक्षण को लेकर एक बार फिर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा की 'आरक्षण हटाओ आंदोलन' के प्रतिनिधियों के साथ हुई बैठक के बाद 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) और आम आदमी पार्टी (AAP) ने सरकार से कई सवाल पूछे हैं। दोनों दलों ने खास तौर पर जाति आधारित आरक्षण की समीक्षा और इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के रुख को लेकर स्पष्टता मांगी है।
जेपी नड्डा की बैठक के बाद CJP ने सरकार से पूछे सवाल
'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के संस्थापक और संयोजक अभिजीत दिपके ने सरकार से पूछा कि जाति आधारित आरक्षण की समीक्षा की मांग पर उसका आधिकारिक रुख क्या है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि 21 अगस्त को हुए आंदोलन के बारे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की क्या राय है। उन्होंने कहा कि केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने अपनी प्रतिक्रिया में आंदोलन का नाम तक नहीं लिया, जबकि देश इस मुद्दे पर सरकार की स्पष्ट स्थिति जानना चाहता है।
AAP ने भी आरक्षण की समीक्षा पर मांगा जवाब
जेपी नड्डा की बैठक के बाद आम आदमी पार्टी ने भी सरकार को घेरा। दिल्ली AAP अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने X पर लिखा कि बीजेपी से जुड़े सवर्ण मोर्चा आंदोलन की मुख्य मांग जाति आधारित आरक्षण पर पुनर्विचार की थी। उन्होंने सरकार से इस मांग पर अपना रुख स्पष्ट करने को कहा।
जेपी नड्डा ने बैठक के बाद क्या कहा?
केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने बताया कि 21 अगस्त को जंतर-मंतर पर हुए आंदोलन के बाद पहले से तय कार्यक्रम के अनुसार आंदोलन के प्रतिनिधियों से सौहार्दपूर्ण बातचीत हुई। उन्होंने कहा, "टीम के सदस्यों हर्ष दुबे, रण बहादुर सिंह चौहान और मृत्युंजय पाठक के साथ सकारात्मक बातचीत हुई है। इस सिलसिले में जल्द ही फिर बैठक होगी।" हालांकि, उन्होंने यह नहीं बताया कि बैठक कहां हुई और बातचीत में किन मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई।
21 अगस्त को दिल्ली में क्या हुआ था?
21 अगस्त को 'आरक्षण हटाओ आंदोलन' के आह्वान पर बड़ी संख्या में लोग दिल्ली के जंतर-मंतर पर इकट्ठा हुए। दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को जंतर-मंतर की बजाय रामलीला मैदान में प्रदर्शन करने की अनुमति दी थी। इसके बावजूद कई लोग जंतर-मंतर पहुंचे। स्थिति को देखते हुए पुलिस और अर्धसैनिक बलों की भारी तैनाती की गई। इस दौरान कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में भी लिया गया।
क्या है 'आरक्षण हटाओ आंदोलन' की मुख्य मांग?
- प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांग है कि सरकारी नौकरियों और शिक्षा में जाति आधारित आरक्षण व्यवस्था को समाप्त किया जाए।
- उनका कहना है कि सरकारी सहायता और आरक्षण का आधार जाति के बजाय आर्थिक स्थिति होनी चाहिए, ताकि आर्थिक रूप से कमजोर सभी लोगों को समान अवसर मिल सकें।
क्रीमी लेयर व्यवस्था को लेकर भी उठी मांग
आंदोलन से जुड़े लोगों ने यह भी मांग की है कि आरक्षित वर्गों के भीतर 'क्रीमी लेयर' नियम को लागू किया जाए या आय के आधार पर पात्रता तय करने की व्यवस्था को और प्रभावी बनाया जाए। उनका कहना है कि इससे आरक्षण का लाभ वास्तव में जरूरतमंद लोगों तक पहुंच सकेगा।
आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के लिए अलग सहायता की मांग
प्रदर्शनकारियों ने आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए छात्रवृत्ति, फीस में राहत, कोचिंग सहायता और अन्य शैक्षणिक सुविधाओं का विस्तार करने की भी मांग की है। उनका कहना है कि जरूरतमंद विद्यार्थियों को लक्षित सहायता दी जानी चाहिए ताकि उन्हें शिक्षा और रोजगार में बेहतर अवसर मिल सकें।
SC, ST और OBC आरक्षण नीतियों की समीक्षा की मांग
'आरक्षण हटाओ आंदोलन' ने अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) से जुड़े आरक्षण प्रावधानों की समीक्षा की भी मांग उठाई है। इसमें उच्च शिक्षा में आरक्षण से जुड़ी नीतियों और अन्य संबंधित प्रावधानों में बदलाव की मांग शामिल है।
SC/ST एक्ट और UGC से जुड़े मुद्दे भी उठाए
प्रदर्शनकारियों ने अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम से जुड़े प्रावधानों पर भी सवाल उठाए हैं। इसके अलावा, उन्होंने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के उच्च शिक्षा से जुड़े ढांचे और नीतियों की समीक्षा की मांग भी सरकार के सामने रखी है।


